मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम व वचनबद्धता

वर्तमान पीढ़ी को भी इससे सीख लेना चाहिए कि माता-पिता की इच्छा व माता-पिता की वचनबद्धता का कितना महत्व है। और हमें हमेशा उनके कहें वचनों का सत्यता व पूर्ण निष्ठा के साथ पालन करना चाहिए।

बैंगलोर कार्यशाला के अनुभव व लेखन कला

बैंगलुरू में इंडिका अकादमी के द्वारा आयोजित यह कार्यशाला लेखन व लेखन के क्षेत्र में संभावनाओं पर महत्वपूर्ण रही। आमंत्रित सभी सदस्यों से गुणवत्तापूर्ण यह संवाद व चर्चा लेखन क्षेत्र में भविष्य के नये मार्ग प्रशस्त करेंगा।

राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा व गोवा मुक्ति मोर्चा के अमर बलिदानी राजाभाऊ महांकाल

राष्ट्रीय ध्वज व भारतवर्ष के राष्ट्रीय गौरव तिरंगे को गिरने नहीं दिया। ऐसे राष्ट्रभक्त राजाभाऊ जी अंतः 15 अगस्त 1955 को हम सब को छोड़कर बलिदानी हो गए।

श्रीराम-शबरी मिलन: प्रभु श्रीराम की ‘नवधा भक्ति’ के नौ रस

नवधा भक्ति में लीन शबरी ने श्री राम का अनुपम दर्शन कर के उस गति को प्राप्त कर लिया जो योगियों के लिए भी दुर्लभ है।

चिकित्सा

भारतीय संस्कृति व चिकित्सा पद्धति में आयुर्वेद का महत्व – भाग २

आयुर्वेद रोग के उपचार से ज्यादा अनुसाशनात्मक जीवन की बात करता है। यदि कोई वैद्य के पास जाता है तो उसे न केवल दवा दी जाती है बल्कि कुछ मंत्र भी दिया जाता है जैसे- भोजन करें आराम से, सब चिंता को मार।

आयुर्वेद

भारतीय संस्कृति व चिकित्सा पद्धति में आयुर्वेद का महत्व – भाग १

आयुर्वेद संपूर्ण प्राणी जगत के लिए उसकी आयु का रक्षा शास्त्र है। यह मानव के सम्पूर्ण मानसिक व शारीरिक स्वास्थ्य की बात करता हैं। साथ ही आयुर्वेद में स्पष्ट उल्लेख है कि मानव को अपनी व बाह्य प्रकृति से सामजंस्य बनाकर ही अपना जीवनयापन करना चाहिए।

राम लक्ष्मण सीता

जन-जन के मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम – भाग १

निराला के श्रीराम वाल्मीकि, तुलसी, कम्बन आदि की रामायण से अलग हैं क्यूंकि यहां पर राम डरते भी हैं, घबराते भी हैं और रोते भी हैं।

शंकराचार्य

भारतवर्ष की प्राचीन गुरुकुल प्रणाली – भाग ३

अंग्रेज विद्वान एलफिंस्टन ने सन् १८२४ में शिक्षा पर अपनी रिपोर्ट में स्पष्टतः भारतीयों के लिए भारतीय भाषाओं व शिक्षा व्यवस्था पर बल दिया था। लेकिन ग्रांट, वार्डन और मैकॉले जैसे अंग्रेज अधिकारी भारतीय जनता के हितचिंतक नहीं थे। इसलिए इन्होंने एलफिंस्टन के प्रस्ताव को ठुकरा दिया।

ram vashishtha

भारतवर्ष की प्राचीन गुरुकुल प्रणाली – भाग २

प्राचीनकाल में धौम्य, च्यवन ऋषि, द्रोणाचार्य, सांदीपनि(उज्जैन), वशिष्ठ, विश्वामित्र, वाल्मीकि, गौतम, भारद्वाज आदि ऋषियों के आश्रम प्रसिद्ध थे। बौद्धकाल में बुद्ध, महावीर व शंकराचार्य की परंपरा से जुड़े गुरुकुल जगप्रसिद्ध थे, जहां विश्वभर से मुमुक्षु ज्ञान प्राप्त करने आते थे तथा जहां गणित, ज्योतिष, खगोल, विज्ञान, भौतिक आदि सभी तरह की शिक्षा दी जाती थी।

कृष्णा सुदामा

भारतवर्ष की प्राचीन गुरुकुल प्रणाली – भाग १

प्राचीन भारतीय काल में अध्ययन अध्यापन के प्रधान केंद्र गुरुकुल हुआ करते थे, जहाँ दूर-दूर से ब्रह्मचारी विद्यार्थी, अथवा सत्यान्वेषी परिव्राजक अपनी अपनी शिक्षाओं को पूर्ण करने जाते थे। वे गुरुकुल छोटे अथवा बड़े सभी प्रकार के होते थे।

श्रीमद्भगवद्गीता- जीवन का मूल दर्शन

कुरुक्षेत्र की धर्म युद्ध पृष्ठभूमि में ५००० वर्ष पूर्व भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को उपदेश दिया जो श्रीमद्भगवदगीता के नाम से प्रसिद्ध है। यह कौरवों व पांडवों के बीच युद्ध महाभारत के भीष्मपर्व का अंग है। जैसा गीता के शंकर भाष्य में कहा है- तं धर्मं भगवता यथोपदिष्ट वेदव्यासः सर्वज्ञोभगवान् गीताख्यैः सप्तभिः श्लोकशतैरु पनिबन्ध । गीता में १८ अध्याय और ७०० श्लोक हैं।