कल दिनांक १२ नवम्बर २०२२ को कॉन्स्टीट्यूशन क्लब ऑफ इंडिया, दिल्ली में प्रोफ़ेसर कपिल कपूर द्वारा लेखक डॉ. मनीष श्रीवास्तव की पुस्तक शृंखला क्रांतिदूत के चौथे और पांचवें भाग का विमोचन किया गया।
प्रोफ़ेसर कपूर प्रधानमंत्री के 75वें वर्ष अमृत महोत्सव कमेटी के सदस्य, संपादकीय समिति, भारतीय ऐतिहासिक अभिलेख समिति तथा राष्ट्रीय अभिलेखागार के अध्यक्ष प्रोफेसर कपिल कपूर ने लोकार्पण करते हुए इतिहास के उस अध्याय की अहमियत बताई जो इन पुस्तकों में दर्ज है। ऐसा इतिहास जो इन। पुस्तकों के जरिए वर्तमान में बदल जाता है। पाठक उन्हें पढ़ते हुए उसी दुनिया में पहुंच जाता है जिस दौर की कहानी पन्नों पर छपी है।
अमर शहीद चंद्र शेखर आजाद, सरदार भगत सिंह, सुखदेव, राजगुरु, भाई परमानंद, भगवती चरण, लाला हरदयाल, गणेश शंकर, सदाशिव, विश्वनाथ, मास्टर जी सभी के संस्मरण उनके सगे संबंधियों के संस्मरण और अभिलेखों पर आधारित है दस पुस्तकों की ये शृंखला क्रांतिदूत।
ये संस्मरण इन क्रांतिदूतों की चौकड़ी की अंतरंगता बताते हैं। इनकी आम जिंदगी में होने वाली बातों, घटने वाली रोजमर्रा की घटनाओं, हंसी मजाक, धौल धप्पे, लड़ाई झगड़े की बारीक निशानदेही इस शृंखला की पुस्तकें करती हैं।
शृंखला की सबसे पहली पुस्तक झांसी फाइल्स 1926 के आसपास की घटनाओं को समेटती है जिसमें आजाद और अन्य क्रांतिकारी साथियों के अज्ञातवास और उस दौरान उनकी पहली मुलाकात और बाद में बनने वाली योजनाओं की बात है।
काशी में आजाद के काशी प्रवास और उस दौरान घटी घटनाओं का आंखों देखा हाल है।
तीसरी कड़ी मित्रमेला में लाहौर के नेशनल कॉलेज में हुई घटनाएं दर्ज हैं।
अबकी बार गदर और बसंती चोला का लोकार्पण हुआ है।
गदर में कनाडा और अमेरिका में सिख क्रांतिकारियों के युद्धघोष की दास्तां है जिसमें कोमागाटा मारू, बाबा करतार सिंह सराभा, बाबा वतन सिंह, मदन लाल ढींगड़ा आदि दिखते हैं।
बसंती चोला में भगत सिंह, अजीत सिंह, रास बिहारी, अवध बिहारी, हनुमंत सहाय और मास्टर अमीर चंद जैसे युवा क्रांतिकारी होंगे।
उत्तर प्रदेश, झाँसी के मूल निवासी डॉ. मनीष श्रीवास्तव पिछले पंद्रह वर्षों से मैं इंडोनेशिया में कार्यरत हैं। कार्यक्रम में लेखक डॉ. मनीष श्रीवास्तव को सर्वभाषा ट्रस्ट की और से सूर्य कान्त त्रिपाठी निराला साहित्य सम्मान पुरस्कार प्रदान किया गया। इस अवसर पर देश के अनेक भागों से आये पाठकगण, सुधिजन, उधमी और समाज के कई वर्गों के लोग उपस्थित थे।
पुस्तक के प्रकाशक सर्व भाषा ट्रस्ट हैं और बिक्री के लिए अब सभी पुस्तकें उपलब्ध हैं।
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