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श्रीराम-शबरी मिलन: प्रभु श्रीराम की ‘नवधा भक्ति’ के नौ रस

नवधा भक्ति में लीन शबरी ने श्री राम का अनुपम दर्शन कर के उस गति को प्राप्त कर लिया जो योगियों के लिए भी दुर्लभ है।

राम लक्ष्मण सीता

जन-जन के मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम – भाग १

निराला के श्रीराम वाल्मीकि, तुलसी, कम्बन आदि की रामायण से अलग हैं क्यूंकि यहां पर राम डरते भी हैं, घबराते भी हैं और रोते भी हैं।

Tulsidas

अपने-अपने राम

कथा प्रसंग जुड़ते रहेंगे, माध्यम परिवर्तित होते रहेंगे परंतु राम त्रेता से कलयुग के ‘आदिपुरुष’ थे,हैं और रहेंगे। गरिमा तिवारी बता रही हैं आपने, उनके और हमारे राम की भक्ति कथा।

उत्तर काण्ड – दुविधा के कारण

रामायण हमारे सबसे बड़े और महान महाकाव्यों में से एक है, इसे एक जीवित शिक्षक के तुल्य माना जाता है जो लोगों को सभ्य मानव के रूप में अग्रणी जीवन की बारीकियों से अवगत कराता है।